बेरंग सी ज़िन्दगी में रंग हो तुम , जीने का मेरे इक ढंग हो तुम , दुनिया की नज़रों में दूर हो मुझसे , पर मेरी नज़रों में मेरे संग हो तुम ,,,,,,,,,,,,,,,,,,, मेरे संग हो तुम ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मीनू तरगोत्रा
आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 05-01-2017 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2576 में दिया जाएगा
ReplyDeleteधन्यवाद
Bhut achhi kavita likha hai apne, is kavita ko book ka roop dene ke liye hme visit kre:https://www.onlinegatha.com/
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